'विराट' मां के सूरज गवांगे

पूनम तिवारी अउ दीपक तिवारी के घर के 'सूरज' भुतागे

संपादकीय 3 नवंबर 2019। अपन सरी उमर ल कला खातिर समर्पित करइया दाई-ददा के दुलारवा बेटा सूरज घलोक आज कलाकारी करत खुवार होगे। हां 'सूरज' के नाव ले ही तो उनला जानथे फेर मया के नाव 'बीरू' रिहिसे। महतारी पूनम विराट तिवारी अउ पिता दीपक तिवारी ल ये कला जगत म भला कोन नइ जानय। राजनांदगांव के माटी ले निकल के देश विदेश म छत्तीसगढ़ी लोककला के सोर बगरावत बखत मां-बाप अइसन कल्पना तको नइ करे रिहिन होही के कभू बेटा के लाश म बइठे गीत के आदरांजली गाये परही। बड़ रोवासू होके ये अकाट सत्य बताये बर परत हे के महान लोक कलाकार श्री दीपक तिवारी अउ पूनम तिवारी के दुलरवा बेटा सूरज तिवारी अब सरगवासी होगे।

कलाकार बेटा के आखरी बिदाई म कला के पुजारिन महतारी रोई-रोई के काहत हे-

चोला माटी के हे राम
एकर का भरोसा, चोला माटी के हे रे...
चोला माटी के हे हो।
हाय चोला माटी के हे राम
एकर का भरोसा, चोला माटी के हे रे...
द्रोणा जइसे गुरू चले गे
करन जइसे दानी संगी, करन जइसे दानी
बाली जइसे बीर चले गे, रावन कस अभिमानी।। चोला माटी के हे राम...
कोनो रिहिस ना कोनो रहय भई आही सब के पारी
एक दिन आही सब के पारी
काल कोनो ल छोंड़े नहीं राजा रंक भिखारी।। चोला माटी के हे राम...
भव से पार लगे बर हे ते हरि के नाम सुमर ले संगी
हरि के नाम सुमर ले
ए दुनिया मा आके रे पगला जीवन मुक्ती कर ले।। चोला माटी के हे राम...
चोला माटी के हे हो
हाय चोला माटी के हे राम
एकर का भरोसा, चोला माटी के हे रे...
महतारी के कोख म नौ महीना अउ ये दुनिया म आंखे उघारे लगभग तीसेक बच्छर होये रिहिसे। जवान बेटा के आखरी इच्छा के मुताबिक मां के गाये कालयजी गीत संग बिदाई कोनो किस्सा कहानी कस लागथे। फेर ये सत्य आए, अउ मां पूनम ही अइसन करे सकथे। देखे अउ सुने भर म हिरदे कांप जथे बेटा के लाश माड़े हे नता रिस्तेदार मन आरती उतारत हावय। संगी मन संगत कर हे अउ महतारी ह रोई-रोई के गीत गावत हावय, हे! भगवान। धन्य हे वो महतारी जेन अपन आलौद के आखरी मंसा ल पूरा करिस। 
एक महान कलाकार सूरज ले बहुत कुछ इच्छा रिहिसे लोगन के संग दाई-ददा ल। बहुमुखी प्रतिभा के धनी रिहिसे सूरज तिवारी। कोन नइ जानय दीपक, पूनम अउ बीरू ल। पद्म विभूषण ले सम्मानित श्री हबीब तनवीर के नया थियेटर के ये जबर कलाकार पूरा परिवार संग छत्तीसगढ़ी लोक कला के सेवा म लगे रिहिसे। हबीब साहब के राहत अउ ओकर जाये के बाद भी इंकर परिवार के आर्थिक हालात म कोनो सुधार नइ आइस। नाम अउ प्रसिद्धि भर कमाइन हे, धनाभाव तब भी रिहिसे अब भी हावय। वइसे ये परिवार के संग घरूक मेल मुलाकात तो नइ रिहिसे सिरिफ कलाकारी ले आत्मियता बने रिहिसे। केउ कार्यक्रम म प्रत्यक्ष भेट होवय अउ सोशल मीडिया म तो रोजेच देखदेखी होवय सूरज संग। लोक कला के ओमन सच्चा साधक रिहिन हावय। पूरा परिवार इही म गुजारा करय। सरकारी कार्यक्रम घलोक पूनम अउ दीपक के सेती मिल जावय। सूरज के सियानी आए ले परिवार के माली हालत सुधरत रिहिसे कि अचानक ओकरो तबियत बिगड़गे। सूरज के इलाज चलत रिहिसे, सुनई म आइये हावय के ओकर आपरेसन होय रिहिसे। बीमार रेहे के बाद भी कार्यक्रम म जावय। कला ओकर परान रिहिसे, बीमारी के बाद भी मंच ल नइ छोड़िस। 
ये बदकिस्मती आए की नियती मे नइ जानव फेर दूनो ह पूनम विराट तिवारी के संग-संग चलत हावय। दीपक तिवारी बीमार होगे, कलागुरू हबीब तनवीर अउ संगीतगुरू देवीलाल नाग सिरागे, अब जवान बेटा घलो गवांगे। अउ कतका परीक्षा देही महतारी पूनम ह ते भगवाने जाने। आत्मा बहुत दुखथे, भगवान कलाकारे मन संग अइसने काबर करथे। अउ ते अउ कलाकार के बखत बेरा म सरकार तको मदद नइ करय। लोगन मन काहत रिहिसे के सूरज के अस्पताल म आपरेशन के खर्चा ल संगी-साथी मन चंदा करके करिन। का सरम नइ आवय शासन-प्रसासन ल। अरे सूरज घलोक नानमून कलाकार नइ रिहिसे मां अउ बाप दूनो के गुण रिहिसे ओकर भीतर। गजब के तबला बजावे, गाना भी गावय, अभिनय भी करय, पार्टी के संचालन तको करय। बहुमुखी प्रतिभा भरे रिहिसे ओकर भीतर, अब गए न अकाल बीमारी म खुवार होगे। चेतय सरकार ह अउ बने चेत करय सच्चा कला साधक मनके, अतके अरजी हावय मोर सरकार ल श्रद्घांजलि स्वरूप महान कलाकार मन खातिर।

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